হাওড়ার অতি প্রাচীন দুই ব্রিজের পুনর্নির্মাণে বড় বাধা! রেল-রাজ্য টানাপোড়েনে বিপাকে লাখ লাখ যাত্রী

হাওড়া স্টেশনের অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ দুই সেতু— বেনারস ব্রিজ ও চাঁদমারি ব্রিজ এখন খবরের শিরোনামে। ১৯০৪ সালে নির্মিত বেনারস ব্রিজ এবং ১৯৩৩ সালের চাঁদমারি ব্রিজ ইতিমধ্যেই তাদের নির্ধারিত আয়ুষ্কাল অতিক্রম করেছে। দৃশ্যমান ক্ষয় ও কাঠামোগত দুর্বলতার কারণে এই সেতু দুটিকে বর্তমানে কড়া কারিগরি পর্যবেক্ষণে রাখা হয়েছে। রেল সূত্রে খবর, জননিরাপত্তার কথা মাথায় রেখে সম্পূর্ণ নিজস্ব তহবিলে ব্রিজ দুটির পুনর্নির্মাণের কাজ শুরু করেছে পূর্ব রেল। বেনারস ব্রিজের জন্য ৭০.৬৯ কোটি এবং চাঁদমারি ব্রিজের জন্য ১৭৩.৯৪ কোটি টাকা বরাদ্দ করা হয়েছে।
রেলের দাবি, তাদের নিজস্ব সীমানার মধ্যে থাকা ব্রিজের মূল অংশের কাজ ইতিমধ্যেই সম্পন্ন হয়েছে। তবে আসল সমস্যা তৈরি হয়েছে রেলের সীমানার বাইরের সংযোগকারী রাস্তা (Road Approaches) নির্মাণ নিয়ে। এই কাজ শেষ করতে প্রয়োজন রাজ্য প্রশাসনের ট্রাফিক নিয়ন্ত্রণ সংক্রান্ত আনুষ্ঠানিক অনুমতি। রেলের পক্ষ থেকে জানানো হয়েছে, গত ১৮ এপ্রিল ২০২৫ থেকে ১৪ নভেম্বর ২০২৫ পর্যন্ত একাধিকবার রাজ্য সরকারকে চিঠি দিয়ে আবেদন জানানো হলেও এখনও সবুজ সংকেত মেলেনি।
রেল আধিকারিকদের মতে, এই সংযোগকারী রাস্তা তৈরিতে দেরি হলে কেবল পথচারীদের সুরক্ষাই বিঘ্নিত হবে না, বরং হাওড়া স্টেশন থেকে ছাড়ার শহরতলি ও দূরপাল্লার ট্রেন চলাচলেও প্রভাব পড়তে পারে। রেল স্পষ্ট করেছে যে, রাজ্য কর্তৃপক্ষের অনুমতি পাওয়া মাত্রই তারা বাকি কাজ শেষ করতে প্রস্তুত। ট্রাফিক ব্লকের কারণে কাজ আটকে থাকার অভিযোগ অস্বীকার করে রেল এখন কেবল নবান্নের চূড়ান্ত অনুমোদনের অপেক্ষায়।
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हावड़ा के दो ऐतिहासिक पुलों पर मंडराया संकट: रेलवे ने पूरा किया अपना काम, पर राज्य सरकार की मंजूरी का इंतजार!
हावड़ा डिवीजन के दो प्रमुख सेतु, बनारस ब्रिज (1904) और चांदमारी ब्रिज (1933), अपनी निर्धारित आयु पूरी कर चुके हैं। संरचनात्मक कमजोरी के कारण ये पुल वर्तमान में खतरे की जद में हैं और निरंतर तकनीकी निगरानी में रखे गए हैं। रेलवे ने जन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अपने स्वयं के फंड से इनके पुनर्निर्माण का बीड़ा उठाया है। बनारस ब्रिज के लिए 70.69 करोड़ रुपये और चांदमारी ब्रिज के लिए 173.94 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, रेलवे सीमा के भीतर मुख्य पुल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब शेष कार्य, जिसमें रेलवे सीमा के बाहर संपर्क सड़कों (Road Approaches) का निर्माण शामिल है, राज्य अधिकारियों से सड़क यातायात नियंत्रण की औपचारिक प्रशासनिक मंजूरी के अभाव में लटका हुआ है। पूर्व रेलवे ने 18 अप्रैल 2025 से 14 नवंबर 2025 के बीच राज्य प्रशासन को कई पत्र लिखे हैं और बैठकें भी की हैं, लेकिन अभी तक आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं हुई है।
पुलों की जर्जर हालत को देखते हुए, पैदल यात्रियों की सुरक्षा और हावड़ा स्टेशन से चलने वाली लोकल व एक्सप्रेस ट्रेनों के सुचारू संचालन के लिए इस कार्य को समय पर पूरा करना अनिवार्य है। रेलवे ने उन आरोपों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि ट्रैफिक ब्लॉक के कारण काम पूरा नहीं हो पा रहा है। अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है, और अनुमति मिलते ही रेलवे शेष काम पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।